महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर दिल्ली प्रेस क्लब में हुंकार: “न डरेंगे, न झुकेंगे, न रुकेंगे”
मेरठ, लखनऊ से दिल्ली तक महिला पत्रकारों ने सुनाई उत्पीड़न की दास्तान, पुलिस कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली | संवाददाता। दिल्ली प्रेस क्लब में शुक्रवार को महिला पत्रकारों की सुरक्षा, कथित उत्पीड़न और पत्रकारिता की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए काम कर रहे संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों तथा महिला पत्रकारों ने अपनी आपबीती साझा की। वक्ताओं ने पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दे उठाने का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रेसवार्ता में मेरठ की महिला रिपोर्टर पूजा माथुर, लखनऊ की पत्रकार विद्या श्रीवास्तव तथा दिल्ली की पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने कथित उत्पीड़न और पुलिस कार्रवाई के संबंध में गंभीर आरोप लगाए।

मेरठ मस्जिद विध्वंस की रिपोर्टिंग पर मुकदमे का आरोप, पूजा माथुर बोलीं—“मेरी कलम न रुकेगी, न झुकेगी”
मेरठ की महिला रिपोर्टर पूजा माथुर ने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि मेरठ प्रशासन ने कथित तौर पर बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए लगभग 100 वर्ष पुरानी मस्जिद को सुबह करीब चार बजे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। पूजा के अनुसार, वह घटना की रिपोर्टिंग करने मौके पर पहुंची थीं, जिसके बाद मेरठ पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
पूजा माथुर ने आरोप लगाया कि उन्हें मुस्लिम बताया गया और सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं, जबकि उनके आरोप के अनुसार पुलिस ट्रोल करने वालों का बचाव कर रही है।
महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए पूजा ने कहा कि पुलिस प्रशासन के अधीन काम करने वाली महिला पत्रकारों को ही कथित तौर पर उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
पूजा माथुर ने कहा:
“मेरे पिता फौजी हैं। मैं डरने वाली नहीं हूं। पुलिस के डर से न मेरी कलम रुकने वाली है और न ही मैं झुकने वाली हूं। बंदिशों को तोड़कर बाहर आई हूं। मैं सच को सच बोलती रहूंगी।”
मुख्यमंत्री की प्रेसवार्ता में सवाल पूछने पर विवाद: विद्या श्रीवास्तव बोलीं—“मैं पत्रकार हूं, अपराधी नहीं”
लखनऊ की महिला पत्रकार विद्या श्रीवास्तव भी दिल्ली प्रेस क्लब में आयोजित “Stop Targeting Women Journalists” कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेसवार्ता के दौरान सवाल पूछने के बाद कथित तौर पर हुए उत्पीड़न और सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने का अपना अनुभव साझा किया।
विद्या श्रीवास्तव ने बताया कि वह स्नातक हैं और एक मीडिया संस्थान के लिए समाचार रिपोर्टिंग का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना पत्रकार का कर्तव्य है और वह आगे भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेंगी।
उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रेसवार्ता में अपना भाषण दिया और पत्रकारों के लिए चाय-नाश्ते की घोषणा कर जाने लगे, जबकि पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए जाने की अपेक्षा थी। विद्या ने कहा कि जब अन्य पत्रकारों ने सवाल नहीं किया, तो उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सवाल पूछा।
विद्या ने आरोप लगाया कि इसके बाद उन्हें अपमानित किया गया, अश्लील और अभद्र टिप्पणियों का सामना करना पड़ा तथा उन्हें डराने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उन पर किसी राजनीतिक दल द्वारा भेजे जाने का आरोप लगाया गया।
विद्या श्रीवास्तव ने कहा:
“मैं पत्रकार हूं, अपराधी नहीं हूं। सत्ता के दबाव में मैं अपने रास्ते से हटने वाली नहीं हूं। मैं ईमानदारी और निडरता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहूंगी।”
दिल्ली के साकेत में महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट का आरोप, शाहीन और नफीसा ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल
प्रेस क्लब के कार्यक्रम में दिल्ली की महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने भी हिस्सा लिया। दोनों ने करीब 15 दिन पहले दिल्ली के साकेत क्षेत्र में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया।
दोनों पत्रकारों के अनुसार, वे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल करने के लिए कार्यक्रम में पहुंची थीं। उनका आरोप है कि सवाल पूछने के बाद दिल्ली पुलिस उन्हें थाने ले गई, जहां उनके साथ मारपीट की गई और जाति एवं धर्म से संबंधित अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
शाहीन और नफीसा ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनका धर्म पूछा और जब उन्होंने स्वयं को मुस्लिम बताया, तो पुलिस का रवैया बदल गया। उन्होंने एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा लाठी-डंडों से मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया।
दोनों पत्रकारों के अनुसार, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा:
महिला पत्रकारों को हिरासत में लेने का आधार क्या था?
उनके साथ कथित तौर पर अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया गया?
मारपीट के आरोपों में पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई?
क्या पत्रकारों से सवाल पूछने के अधिकार को दबाने का प्रयास किया गया?
शाहीन खान और नफीसा खान ने मामले की निष्पक्ष जांच और कथित रूप से जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
“देश संविधान से चलेगा, नफरत से नहीं”—महिला पत्रकारों का साझा संदेश
प्रेसवार्ता के दौरान शाहीन खान और नफीसा खान ने संविधान को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि देश संविधान के आधार पर चलेगा, न कि हिंदू-मुसलमान के नाम पर नफरत फैलाने से।
उन्होंने कहा:
“हमारी ताकत हमारा संविधान है, जिसने हमें बोलने, लिखने, पढ़ने और सवाल करने का अधिकार दिया है। हम न डरेंगे, न झुकेंगे और न रुकेंगे।”
महिला पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सच्चाई सामने लाना, जनहित के सवाल उठाना और जनता तक सही जानकारी पहुंचाना है। उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा, धार्मिक पहचान के आधार पर कथित भेदभाव तथा पुलिस जवाबदेही से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
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