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Noida News: नोएडा में इंजीनियर की मौत: क्या यही लोकेश एम के तबादले की असली वजह है?

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गौतमबुद्ध नगर। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. का स्थानांतरण केवल एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय मानकर टाल देना आसान होता, यदि इसके पीछे हालिया घटनाक्रम न होते। लेकिन नोएडा में एक युवा इंजीनियर की दर्दनाक मौत के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह हादसा ही उस फैसले की अहम वजह बना, जिसने सरकार को सीईओ बदलने पर मजबूर किया।

नोएडा जैसे आधुनिक और योजनाबद्ध शहर में यदि कोई नागरिक या पेशेवर अपनी जान गंवाता है, तो यह महज़ एक दुर्घटना नहीं रह जाती, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। बताया गया कि इंजीनियर की मौत निर्माणाधीन क्षेत्र में हुई, जहां सड़क, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतों की गंभीर कमी थी। यह वही लापरवाही है, जिसे लेकर आम लोग वर्षों से शिकायत करते आए हैं, लेकिन प्राधिकरण स्तर पर इसे अक्सर नजरअंदाज किया गया।

नोएडा प्राधिकरण के कामकाज को लेकर असंतोष कोई नया नहीं है। बीते लंबे समय से किसानों की समस्याओं का समाधान न होना, मुआवजा, आबादी भूखंड, अधिग्रहण और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर लगातार टालमटोल—ये सब बातें प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करती रही हैं। हालात यह रहे कि किसानों और स्थानीय नागरिकों की शिकायतें लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचती रहीं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात में कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दिया।

इसी बीच कल सेक्टर 150 में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एक युवा इंजीनियर की मौत ने उस लापरवाही को उजागर कर दिया, जिसे लोग रोज़मर्रा की जिंदगी में झेलते आ रहे थे। निर्माणाधीन क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों की कमी, अधूरी सड़कें, चेतावनी संकेतों का अभाव—ये सब किसी भी हादसे को न्योता देने के लिए काफी थे। यह मौत केवल एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि उस सिस्टम का आईना थी जो शिकायतों के बावजूद आंख मूंदे बैठा रहा।

इस घटना के बाद नागरवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। लोग सड़कों पर उतर आए, प्रदर्शन शुरू हो गया और प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी खुलकर सामने आई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक प्राधिकरण और प्रशासन हर समस्या को नजरअंदाज करता रहता है। किसानों की वर्षों पुरानी मांगें हों या आम नागरिकों की रोजमर्रा की शिकायतें—सबको फाइलों में दबा दिया जाता है।

एडिटोरियल का मानना है कि सेक्टर 150 में हुई युवा इंजीनियर की मौत ने उस असंतोष को विस्फोटक रूप दे दिया, जो पहले से ही भीतर ही भीतर सुलग रहा था। यह घटना एक ट्रिगर बनी, जिसने लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया। सवाल यह है कि क्या प्रशासन अब भी इसे एक अलग-थलग घटना मानकर आगे बढ़ जाएगा, या फिर इसे चेतावनी समझकर व्यवस्था में सुधार करेगा।

किसानों की समस्याओं का समाधान न होना, नागरिकों की शिकायतों का अनसुना रह जाना और अंततः एक युवा की जान चले जाना—ये सब एक ही कड़ी के हिस्से हैं। यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता दिखाई जाती, तो शायद आज यह नौबत न आती। अब भी वक्त है कि सरकार और प्राधिकरण केवल प्रदर्शन शांत कराने तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस फैसले लें।

नोएडा की जनता और किसान सिर्फ आश्वासन नहीं, परिणाम चाहते हैं। वे चाहते हैं कि शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद महज़ कागज़ी कार्रवाई न बनें, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखे। क्योंकि अगर हर बार किसी की मौत के बाद ही सिस्टम जागता है, तो यह विकास नहीं, बल्कि एक खतरनाक लापरवाही की परंपरा बन जाएगी।

 

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