सपा को बड़ा झटका, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सत्यपाल सिंह सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल
पश्चिमी यूपी में किसान कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने किसानों के अधिकारों की उठाई आवाज
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित 24 अकबर रोड पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित पश्चिमी उत्तर प्रदेश किसान कांग्रेस के कार्यक्रम में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सत्यपाल सिंह ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए बड़ी संख्या में किसानों और समर्थकों की मौजूदगी में हुए इस घटनाक्रम को सपा के लिए बड़ा झटका और कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में किसान और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम रहे। उन्होंने किसानों के अधिकारों, कृषि नीतियों, सामाजिक न्याय और किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

डॉ. सत्यपाल सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से बढ़ी हलचल
बिजनौर निवासी डॉ. सत्यपाल सिंह समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों का कांग्रेस में शामिल होना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
कार्यक्रम में डॉ. सत्यपाल सिंह के साथ शामिल होने वाले प्रमुख लोगों की सूची भी जारी की गई। इनमें संजीव मलिक, लाखन सिंह, जोगेश मलिक, गौरव कुमार, नानक सिंह, अमर पाल सिंह, मयूर सिंह, हरिपाल सिंह, सूरज सिंह, उदल सिंह, रति मान सिंह, चमन सिंह, मुरारी सिंह, राजेश सिंह, राजीव सिंह, सत्येंद्र सिंह देवी, नीरज सिंह, अभिषेक सिंह, अर्जुन सिंह, सौरभ सिंह, ओम प्रकाश सिंह, वैधराज भड़ियार, जितेंद्र सिंह और राजवीर सिंह समेत कई नाम शामिल हैं।
राजेंद्र पाल गौतम ने किसानों के अधिकारों पर की चर्चा
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किसानों के अधिकारों और उनकी मौजूदा समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़ी नीतियों, किसानों की आर्थिक स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।
राजेंद्र पाल गौतम ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने किसानों को सरकार की नीतियों और उनके संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां किसानों और सामाजिक न्याय के हितों के खिलाफ हैं।

राहुल गांधी के समर्थन की अपील
राजेंद्र पाल गौतम ने किसानों और देश के नागरिकों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों, गरीबों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने के लिए जनता को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
हजारों किसानों की मौजूदगी से कांग्रेस ने दिखाया दम
किसान कांग्रेस के कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। कार्यक्रम में किसान अधिकारों, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि लागत, बिजली, सिंचाई, खाद-बीज और किसानों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
किसान कांग्रेस की ओर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने और किसान अधिकार अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
पश्चिमी यूपी में कांग्रेस को मिला नया राजनीतिक आधार
पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय से किसान राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में किसान अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस की सक्रियता और डॉ. सत्यपाल सिंह जैसे वरिष्ठ समाजवादी नेता का पार्टी में शामिल होना कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. सत्यपाल सिंह के साथ सैकड़ों समर्थकों के कांग्रेस में आने से बिजनौर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में कांग्रेस को संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, समाजवादी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम निश्चित तौर पर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

किसान अधिकार अभियान को मिलेगी नई धार
कांग्रेस और किसान कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसानों के मुद्दों को केवल चुनाव तक सीमित नहीं रखा जाएगा। किसान अधिकार, सामाजिक न्याय, कृषि लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे सवालों को लगातार उठाया जाएगा।
कार्यक्रम में किसानों की बड़ी मौजूदगी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सत्यपाल सिंह के कांग्रेस में शामिल होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इसका असर क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर कितना पड़ता है।
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