Breaking News: नई दिल्ली, 29 जुलाई 2025: दिल्ली सरकार ने उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए फैक्ट्री लाइसेंस व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा की है। अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) अथवा दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत ढांचा विकास निगम (DSIIDC) द्वारा मान्यता प्राप्त औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फैक्ट्रियों को नगर निगम (MCD) से अलग से फैक्ट्री लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नई व्यवस्था आज से (29 जुलाई 2025) लागू कर दी गई है।
Breaking News: दिल्ली सरकार ने इस निर्णय को “Ease of Living” और “Ease of Doing Business” को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है। सरकार के मुताबिक, इस बदलाव से न केवल औद्योगिक इकाइयों की लाइसेंस प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि भ्रष्टाचार, अनावश्यक देरी और दोहराव वाली कागजी कार्रवाई से भी निजात मिलेगी।
MSME पंजीकरण या DSIIDC दस्तावेज ही होंगे अब वैध लाइसेंस
Breaking News: नई व्यवस्था के तहत यदि किसी फैक्ट्री के पास MSME उद्यम पंजीकरण, GNCTD/DSIIDC का अलॉटमेंट लेटर या लीज़ डीड है, तो वही दस्तावेज अब धारा 416/417 के तहत DMC एक्ट में वैध MCD लाइसेंस के रूप में स्वीकार किया जाएगा। यानी अब उद्योगपतियों को नगर निगम से अलग से फैक्ट्री लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
क्या होंगे इस फैसले के लाभ?
- दोहरे लाइसेंस की बाध्यता खत्म: अब सिर्फ GNCTD/DSIIDC के दस्तावेज ही पर्याप्त होंगे।
- कागजी कार्रवाई में कमी: आवेदन, निरीक्षण, नवीनीकरण जैसे झंझटों से राहत।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल डॉक्युमेंटेशन और स्वचालित प्रणाली से प्रक्रियाएं सरल और पारदर्शी होंगी।
- व्यवसायिक सुगमता: नए उद्यमियों के लिए दिल्ली में उद्योग शुरू करना अधिक सरल और आकर्षक होगा।
‘आत्मनिर्भर दिल्ली’ की दिशा में कदम
सरकार का मानना है कि यह फैसला राजधानी दिल्ली को “आत्मनिर्भरता और सुविधा आधारित शासन” की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगा। इससे छोटे और मझोले उद्यमों (MSMEs) को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक निवेश को भी नई गति मिलेगी।
सरकार की अपील
दिल्ली सरकार ने उद्योगपतियों, उद्यमियों और संबंधित हितधारकों से अपील की है कि वे इस नई व्यवस्था का लाभ उठाएं और संबंधित दस्तावेजों को अद्यतन कराएं।
नोट: यह नियम केवल उन्हीं औद्योगिक इकाइयों पर लागू होगा जो GNCTD या DSIIDC द्वारा मान्यता प्राप्त औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित हैं। अनाधिकृत/अस्वीकृत क्षेत्रों में पुरानी लाइसेंस प्रणाली यथावत बनी रहेगी।
यह बदलाव दिल्ली की औद्योगिक नीतियों में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे लाखों उद्यमियों को सीधी राहत मिलेगी और दिल्ली को उद्योग-अनुकूल राजधानी के रूप में नई पहचान मिलेगी।













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