मयूर विहार फेज-3 में अतिक्रमण का साम्राज्य: सर्विस रोड पर कब्ज़ा, जनता मुख्य सड़क पर जान जोखिम में डालने को मजबूर
कोंडली विधानसभा में अवैध करबार, प्रदूषण और प्रशासनिक चुप्पी का खतरनाक गठजोड़
रिपोर्ट- केडी सिद्दीक़ी। पूर्वी दिल्ली के कोंडली विधानसभा क्षेत्र का मयूर विहार फेज-3 आज अतिक्रमण, अवैध कारोबार और प्रशासनिक मिलीभगत की मार से कराह रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि सीधे-सीधे नागरिकों की जान से खिलवाड़ का मामला बन गया है।

सर्विस रोड पर कब्ज़ा, लोगों को मुख्य सड़क पर धकेला गया
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पॉकेट A-1 एल आई जी फ्लैट्स की सर्विस रोड पर खुद #PWD पीडब्ल्यूडी द्वारा अवैध कब्ज़ा कर लिया गया है। जिस सर्विस रोड का उद्देश्य स्थानीय निवासियों को सुरक्षित आवागमन देना था, वही आज अवरोधों, ट्रक, ट्रैक्टर और निर्माण सामग्री से घिरी पड़ी है। नतीजा यह है कि बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग—सभी को मजबूरन मुख्य सड़क पर पैदल चलना पड़ रहा है, जहां तेज रफ्तार वाहनों के बीच हर कदम मौत का जोखिम लेकर बढ़ाना पड़ता है। क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
फुटपाथों पर कब्ज़ा, पैदल चलने का अधिकार छिना
इलाके में फुटपाथ लगभग खत्म हो चुके हैं। रेहड़ी-ठेले वालों ने कब्ज़ा कर रखा है। जो थोड़ा-बहुत स्थान बचता है, वह अव्यवस्थित निर्माण और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है। आम नागरिकों से उनका मूलभूत अधिकार—सुरक्षित पैदल मार्ग—छीन लिया गया है।
केरला स्कूल से पॉकेट A-1 LIG तक नालों में अनियमितता
केरला स्कूल से लेकर पॉकेट A-1 एल आई जी फ्लैट्स तक बनाए गए नालों में गंभीर खामियों को देखा जा सकता है। नाला बनाने में कहीं इंजीनियरिंग बिलकुल दिखाई नहीं दे रही है। विभागीय लापरवाही के कारण जहाँ बरसात में निवासियों को जलजमाव की समस्या से जूझना पड़ता है वहीँ लोगों के या जानलेवा भी साबित हो सकता है।
पुराना नाला जो कि खुला छोड़ दिया गया है जोकि जगह-जगह से टूटा, खुला हुआ और उखड़ा पड़ा है। नया नाला नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया बताया जा रहा है। उसके कवर नुकीले और खतरनाक हैं—जो किसी भी दिन किसी बच्चे या बुजुर्ग के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। सेंट मेरी स्कूल के गेट के आसपास गंदगी का अंबार लगा है। सैकड़ों अभिभावक रोज अपने मासूम बच्चों को लेकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि कुंभकर्णी नींद में सोए हैं।
प्रदूषण की घेराबंदी: गंदा नाला, स्लॉटर हाउस, एसटीपी और डंपिंग ग्राउंड
मयूर विहार के चारों ओर प्रदूषण के कई स्रोत मौजूद हैं—गंदा नाला, स्लॉटर हाउस, एसटीपी और डंपिंग ग्राउंड। दुर्गंध, जहरीली हवा और धुएं ने क्षेत्र को घेर रखा है। बुजुर्गों और बच्चों में दमा, टीबी और गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। लोग घुट-घुट कर जीने को मजबूर हैं।
अवैध नशे का खुला कारोबार
कोंडली विधानसभा में अतिक्रमण के साथ-साथ अवैध नशे का कारोबार भी खूब फलफूल रहा है। जबकि नशे के कारण क्षेत्र में कई युवाओं की जान जा चुकी है लेकिन बावजूद इसके पुलिस की मिलीभगत से पान, गुटखा की दुकानों और जूस की ठेलियों की आड़ में शराब और नशीले पदार्थ बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। स्कूल और अस्पताल के आसपास भी ऐसी गतिविधियों के आरोप हैं। युवाओं का भविष्य दांव पर है, लेकिन सिस्टम खामोश है।
मिलीभगत के आरोप
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में अनियमितताएं हुईं और नियमों की अनदेखी कर काम कराया गया। लाखों रुपये की बंदरबांट की चर्चाएं भी आम हैं।अगर ये आरोप सच हैं, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं—जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ है।
सवाल लोकतंत्र से
जब समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, तो जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही कहां है? जनता उन्हें वोट क्यों देती है, अगर बदले में उसे असुरक्षा, गंदगी और अव्यवस्था ही मिले? क्यों समाज चुप है?
अब समय है आवाज उठाने का
मयूर विहार फेज-3 की स्थिति चेतावनी है। यदि अब भी जनता संगठित नहीं हुई, तो अतिक्रमण, प्रदूषण और अवैध कारोबार का यह जाल और मजबूत होगा। यह केवल एक इलाके की कहानी नहीं—यह उस सिस्टम का आईना है जहां जिम्मेदार संस्थाएं मौन हैं और आम आदमी मुख्य सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर है।
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