सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिरी, कई लोगों की मौत की मौत की आशंका, युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में एक छात्र की मौत हो गई है, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
हादसे के वक्त इमारत में हॉस्टल और पीजी संचालित हो रहे थे। चश्मदीदों के मुताबिक, घटना के समय छात्र अपने कमरों में मौजूद थे और इमारत के बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान इमारत की नींव पर अतिरिक्त दबाव पड़ा हो, जिससे यह भयावह हादसा हुआ।
रेस्क्यू टीमों ने अब तक कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मलबे के नीचे कुल कितने छात्र और लोग फंसे हुए हैं। रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी के आधार पर ही वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

मलबे में दबा युवक फोन पर बोला—“मुझे बचा लो”
हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मौके पर मौजूद एक युवक ने बताया कि उसका एक दोस्त मलबे में दबा हुआ है। वह लगातार फोन कर रहा है और बार-बार कह रहा है—“मुझे बचा लो।”
यह स्थिति बचाव अभियान की गंभीरता को सामने रखती है। राहत और बचाव दल मलबे को बेहद सावधानी से हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने भी संभाला मोर्चा
एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि मलबे से तीन लोगों को बाहर निकाला गया और कुल मिलाकर करीब छह से आठ लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
वहीं, मौके पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, गिरी हुई इमारत का नाम “हॉस्टल डेज” बताया जा रहा है। यह लड़कों के लिए संचालित पांच मंजिला पीजी था। इसके ठीक बगल की एक अन्य इमारत के भी गिरने की जानकारी सामने आई है।
चश्मदीद ने बताया कि इमारत में जो छात्र अपने कमरों में मौजूद थे, वे मलबे में फंस गए। कितने छात्र अंदर फंसे हैं, इसकी सही संख्या रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही पता चल सकेगी।
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में रहते हैं DU के छात्र
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में से एक है। यहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं। आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थान हैं।
इसी वजह से इलाके में दिनभर छात्रों की भारी आवाजाही रहती है। हालांकि, सत्य निकेतन में कुल कितने छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
बेसमेंट की खुदाई बनी हादसे की वजह? चार संभावित कारण
मीडिया रिपोर्ट्स और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर इमारत गिरने की चार संभावित वजहें सामने आ रही हैं—
बेसमेंट के लिए खुदाई: इमारत के नीचे बेसमेंट बनाने का काम चल रहा था। इससे नींव पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
कमजोर पिलर: एक चश्मदीद ने दावा किया कि इमारत के निचले हिस्से के पिलर कमजोर थे। यदि पिलर इमारत का भार संभालने में असफल हुए हों, तो ढांचा अचानक गिर सकता है।
निर्माण के दौरान ढांचे में बदलाव: बेसमेंट या अन्य निर्माण कार्य के दौरान नींव, पिलर या इमारत के किसी हिस्से में बदलाव किया गया हो, तो इससे भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो सकती है।
पहले से कमजोर ढांचा: यदि इमारत की नींव या ढांचा पहले से कमजोर था, तो निर्माण कार्य के दौरान पड़ा अतिरिक्त दबाव हादसे की बड़ी वजह बन सकता है।
हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अमित शाह ने गोवा दौरा रद्द किया
हादसे की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गोवा दौरे के दौरान अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। हादसे पर उन्होंने दुख जताया।
भाजपा विधायक कैलाश गहलोत ने कहा कि उन्होंने हादसे की जानकारी ट्विटर पर देखी है। उन्होंने कहा कि इस कठिन घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं और दमकल विभाग तथा आपदा प्रबंधन की टीमें आवश्यक कदम उठा रही हैं।
DUSU अध्यक्ष का दावा—10 से 15 छात्रों को बचाया गया
DUSU अध्यक्ष आर्यन मान ने दावा किया कि अब तक करीब 10 से 15 छात्रों को बचाया जा चुका है, जबकि कुछ लोग अभी भी इमारत के अंदर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे अंदर फंसे लोगों के संपर्क में हैं और NDRF की टीम भी मौके पर पहुंच गई है।
आर्यन मान के मुताबिक, उन्होंने मुख्यमंत्री से भी बात की है और छात्रों की मदद के लिए अन्य टीमें भी मौके पर पहुंच रही हैं।
कांग्रेस और NSUI ने युद्धस्तर पर बचाव अभियान की मांग की
कांग्रेस ने सत्य निकेतन में हुए हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया। पार्टी के मुताबिक, इमारत में ज्यादातर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र रहते थे और कई छात्रों के मलबे में दबे होने की जानकारी सामने आ रही है।
NSUI के कार्यकर्ताओं के मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में सहयोग करने की बात भी कही गई है।
कांग्रेस ने सरकार से अपील की है कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जाए और मलबे में दबे छात्रों तथा अन्य लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए।
छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ कब तक?
सत्य निकेतन की यह घटना सिर्फ एक इमारत गिरने का हादसा नहीं है, बल्कि दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पर्याप्त हॉस्टल की व्यवस्था नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी और हॉस्टलों में रहने को मजबूर हैं। कई जगहों पर सीमित जगह में बड़ी संख्या में छात्रों को रखा जाता है। ऐसे में सुरक्षा मानकों, भवन की मजबूती, फायर सेफ्टी और अवैध निर्माण की जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
हर छात्र का जीवन कीमती है। किसी भी लापरवाही की कीमत छात्रों को अपनी जान देकर नहीं चुकानी चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और सभी बचाव दलों को युद्धस्तर पर अभियान चलाकर एक-एक जिंदगी बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकनी होगी।
सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि इमारत क्यों गिरी।
सवाल यह भी है कि अगर निर्माण के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी हुई थी, तो जिम्मेदार कौन है?
और क्या इस हादसे के बाद प्रशासन दिल्ली के छात्र इलाकों में चल रहे पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से जांच करेगा?
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