छोटे गाँव से अरबों के साम्राज्य तक: लुलु मॉल के मालिक एम. ए. यूसुफ अली की जीवनगाथा
जब भी भारत के सफल प्रवासी भारतीयों की चर्चा होती है, तो एक नाम सबसे पहले जुबान पर आता है – एम. ए. यूसुफ अली।
लुलु समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, अरबों की संपत्ति के मालिक, हजारों लोगों को रोजगार देने वाले और समाजसेवा की मिसाल बने यूसुफ अली की कहानी किसी प्रेरणादायक उपन्यास से कम नहीं।
बचपन: संघर्षों से सीखे सबक
15 नवम्बर 1955 को केरल के त्रिशूर जिले के छोटे से गाँव नट्टिका में जन्मे यूसुफ अली का बचपन बिल्कुल साधारण था।
उनका परिवार मध्यमवर्गीय था। पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर कुछ अच्छा काम करे, पर हालात ऐसे थे कि जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ था।
सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से शिक्षा पाने के बाद उन्होंने बिज़नेस मैनेजमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन में डिप्लोमा किया। यही डिप्लोमा उनके लिए भविष्य के द्वार खोलने वाला साबित हुआ।

सपनों की उड़ान – अबू धाबी की ओर
सन 1973, यह साल उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अपने चाचा के पास अबू धाबी चले गए।
उनके चाचा एम. के. अब्दुल्ला पहले से ही कारोबार करते थे। वहीं से यूसुफ अली ने छोटे-छोटे कामों से शुरुआत की।
शुरुआत आसान नहीं थी। नई जगह, अलग संस्कृति, भाषा की बाधा और पैसे की कमी—सब कुछ चुनौती था। लेकिन यूसुफ अली ने कभी हार नहीं मानी। वे दिन-रात काम करते, सीखते और बाजार की नब्ज़ समझते गए।
लुलु समूह की नींव
90 का दशक खाड़ी देशों में आर्थिक बदलाव का दौर था। सुपरमार्केट और हाइपरमार्केट का नया चलन शुरू हो रहा था। यूसुफ अली ने इसी अवसर को पहचाना और पहला लुलु हाइपरमार्केट शुरू किया।
यह सिर्फ एक दुकान नहीं थी—यह ग्राहकों के अनुभव को बदल देने वाला कदम था।
- यहाँ साफ-सुथरा वातावरण था
- ग्राहकों की हर ज़रूरत का सामान एक ही छत के नीचे मिलता
- और सबसे बड़ी बात, भारतीय और एशियाई प्रवासियों को भी अपने घर जैसा एहसास मिलता
लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया और देखते ही देखते लुलु ग्रुप मध्य पूर्व का सबसे बड़ा रिटेल नेटवर्क बन गया।
आज का लुलु साम्राज्य
आज लुलु ग्रुप एक वैश्विक नाम है—
- 23 देशों में उपस्थिति
- 239 से अधिक स्टोर्स और मॉल्स
- 65,000 से ज्यादा कर्मचारी
- हर साल करोड़ों ग्राहक
अबू धाबी स्थित मुख्यालय से यह साम्राज्य चलता है, लेकिन इसकी जड़ें गहराई से भारत से जुड़ी हुई हैं।
भारत में लुलु का जादू
भारत में पहला लुलु मॉल 2013 में कोच्चि में खुला। इसे भारत का सबसे बड़ा मॉल कहा गया और यह दक्षिण भारत का लैंडमार्क बन गया।
इसके बाद—
- त्रिशूर (2019) – Y Mall
- बेंगलुरु (2021) – आधुनिक और लक्ज़री शॉपिंग का केंद्र
- तिरुवनंतपुरम (2021) – राजधानी का गर्व
- लखनऊ (2022) – उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और आकर्षक मॉल
लखनऊ का लुलु मॉल तो अपने आप में एक पहचान है। यहाँ सिर्फ खरीदारी ही नहीं, बल्कि मनोरंजन, संस्कृति और आधुनिक जीवनशैली का संगम देखने को मिलता है।
समाजसेवा: कारोबारी से बढ़कर इंसान
यूसुफ अली का मानना है कि “सफलता का असली मूल्य तभी है जब आप समाज को उसका हिस्सा लौटाएँ।”
- 2018 की केरल बाढ़ में उन्होंने लगभग 9.5 करोड़ रुपये की सहायता दी।
- शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को लगातार दान देते रहे।
- प्रवासी भारतीयों की समस्याओं में हमेशा मददगार बनकर खड़े रहे।
उनके लिए व्यवसाय सिर्फ पैसा कमाने का साधन नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम है।
पुरस्कार और सम्मान
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले—
- पद्मश्री (2008) – भारत सरकार द्वारा
- प्रवासी भारतीय सम्मान (2005)
- अरब दुनिया के सबसे प्रभावशाली भारतीय उद्यमियों की सूची में लगातार पहला स्थान
- अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा “ग्लोबल इंडियन आइकन” की उपाधि हादसा और हौसला
2021 में वे एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में बाल-बाल बचे। यह अनुभव उनके लिए जीवन का सबक था। इसके बाद उन्होंने कहा—
“ज़िंदगी ईश्वर का दिया हुआ वरदान है, इसे हमेशा अच्छे कामों और समाज की सेवा में लगाना चाहिए।”
सपनों की मिसाल
एम. ए. यूसुफ अली की जीवनी सिर्फ एक कारोबारी की कहानी नहीं, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत और सपनों के सच होने की कहानी है।
- एक छोटे से गाँव का लड़का आज अरबों का मालिक है।
- हजारों परिवार उनकी वजह से रोज़गार पाते हैं।
- भारत और विदेश में उनके काम ने भारतीयों का नाम ऊँचा किया है।
- और सबसे बढ़कर, उन्होंने समाज को कभी नहीं भुलाया।
लुलु मॉल आज केवल शॉपिंग डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि अगर हिम्मत और ईमानदारी हो, तो सपने सच होते हैं।
Discover more from UNITED INDIA LIVE
Subscribe to get the latest posts sent to your email.











