jewar airport inauguration: राजनाथ सिंह के विज़न से मोदी तक: 25 साल बाद हक़ीक़त बना जेवर एयरपोर्ट
नोएडा। (अकरम ख़ान)। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में बहुप्रतीक्षित अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा बनाने का सपना आखिरकार साकार हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च 2026 को इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर देश को एक और विश्वस्तरीय एयरपोर्ट की सौगात दी।
इस मौके पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने ही वर्ष 2021 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।
25 साल पुराना सपना, अब बना हक़ीक़त
इस एयरपोर्ट की परिकल्पना वर्ष 2001 में उस समय के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। इसे एक ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एविएशन हब (टीआईएएच) के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 2003 में इसकी टेक्नो-इकोनॉमिक रिपोर्ट को मंजूरी दी, लेकिन इसके बाद यह परियोजना लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही। करीब ढाई दशक बाद अब यह सपना ज़मीन पर उतर चुका है।
NCR के लिए गेम-चेंजर प्रोजेक्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और NCR के विकास का इंजन माना जा रहा है। इससे अलीगढ़, मेरठ, मथुरा जैसे शहरों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी मिलेगी और क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन व रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कौन बना रहा है एयरपोर्ट?
इस परियोजना की नीलामी 2019 में हुई थी, जिसमें ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल ने प्रतिस्पर्धियों को पछाड़कर निर्माण का ठेका हासिल किया। 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ इसका औपचारिक समझौता हुआ।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड एक संयुक्त उद्यम है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा प्राधिकरण की 37.5-37.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की 12.5-12.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
कनेक्टिविटी: सड़क, रेल और मेट्रो का मजबूत नेटवर्क
यह एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित है, जो ग्रेटर नोएडा और आगरा को सीधे जोड़ता है। इसके अलावा इसे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, एनएच-91, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और प्रस्तावित मेट्रो एक्सटेंशन से जोड़ा जा रहा है।
साथ ही, दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक स्टेशन एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित है और एक्सप्रेसवे के समानांतर सड़क को भी चौड़ा किया जाएगा।
RRTS और रेलवे से भी होगा जुड़ाव
गाजियाबाद से जेवर तक 71.1 किमी लंबा रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) इस एयरपोर्ट को जोड़ेगा, जिसमें 11 स्टेशन होंगे और करीब 16,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। भविष्य में हिसार एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए रेलवे लाइन का भी निर्माण प्रस्तावित है।












