ओखला में सियासी जंग: अमानत उल्लाह ख़ान का ओवैसी पर सीधा हमला, बोले – “अब मुकाबला मुझसे है”
okhla vidhansabha: दिल्ली विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने अपने भाषण में ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं इस हैदराबादी से कहना चाहता हूं कि पहली बार तेरा वास्ता इस अमानतुल्लाह से पड़ा है। पहली मर्तबा तुझसे कोई टकराया है।”
okhla vidhansabha: अमानतुल्लाह खान के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। ओखला सीट पर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प होता जा रहा है, क्योंकि यहां AIMIM, बीजेपी, कांग्रेस, और बीएसपी के प्रत्याशी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
“फिर हमारी विधानसभा में जाने की हिम्मत नहीं करेंगे” – अमानतुल्लाह
अमानतुल्लाह खान ने अपने भाषण में कहा कि ओवैसी मुसलमानों के हितैषी नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस हैदराबादी को इंशाअल्लाह इस हालत में छोड़ेंगे कि फिर वो हमारी विधानसभा में जाने की हिम्मत नहीं करेगा। जहां मुस्लिम नुमाइंदे चुने जाते हैं, वहां पूरे मुल्क में दोबारा जाने की हिम्मत नहीं करेगा।”
खान का इशारा इस ओर था कि ओवैसी की पार्टी AIMIM केवल बीजेपी की मदद करने के लिए चुनावी मैदान में उतरती है और इससे मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता है।
“हमारी लीडरशिप को खत्म किया जा रहा है”
ओखला से दो बार विधायक रह चुके अमानतुल्लाह खान ने दावा किया कि ओवैसी के माध्यम से मुस्लिम नेतृत्व को कमजोर करने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा,
“हमारी लीडरशिप को खत्म कर दिया गया। एक-एक करके हमारी लीडरशिप को खत्म किया जा रहा है। यह आदमी हमें जलील करता है, हमारी इज्जत के साथ खेलता है। जब इसे कुछ कहो तो पूरी मीडिया पीछे लग जाती है। लेकिन पहली बार तेरा सामना इस अमानतुल्लाह से हुआ है।”
खान ने यह भी आरोप लगाया कि ओवैसी केवल चुनावी फायदे के लिए मुसलमानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका कोई काम नहीं है।
“ओखला सीट पर बीजेपी की नजर”
अमानतुल्लाह खान ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस सीट पर AIMIM के जरिए अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा,
“पहली बार ओवैसी ओखला आया है। ओखला वो जगह है, जहां सबसे अधिक पढ़े-लिखे मुसलमान रहते हैं। ये लोग तेरे बहकावे में नहीं आएंगे। AIMIM के तमाम नेता यहां डेरा डाले हुए हैं। लोगों को बीजेपी यहां फंड दे रही है। इस सीट को बीजेपी हथियाना चाहती है। गली-गली ये घूम रहे हैं, कभी हमें डीलर और दलाल कहते हैं, कभी कहते हैं कि हमारी जमानत जब्त होगी। क्या ये तय करेगा कि ओखला का विधायक कौन होगा?” खान का आरोप है कि AIMIM का मकसद केवल मुस्लिम वोटों का विभाजन कर बीजेपी को फायदा पहुंचाना है।
ओखला सीट पर जबरदस्त मुकाबला
ओखला विधानसभा सीट पर इस बार कई पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के अमानतुल्लाह खान, बीजेपी के मनीष चौधरी, कांग्रेस की अरीबा खान, AIMIM के शिफ़ा-उर-रहमान और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के सतीश कुमार चुनाव मैदान में हैं।
शफ़ा-उर-रहमान जेल से लड़ रहे चुनाव
दिल्ली दंगों के आरोपी AIMIM प्रत्याशी शिफ़ा-उर-रहमान इस बार जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं। अदालत ने उन्हें प्रचार के लिए कस्टडी पैरोल दी थी, जिससे वे अपने समर्थकों के बीच जाकर प्रचार कर सकें।
ओखला सीट का महत्व
दिल्ली की ओखला विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल मानी जाती है और यहां से हर बार बड़े मुस्लिम नेता चुनावी मैदान में होते हैं। 2015 और 2020 के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक विश्लेषण: किसके पक्ष में जा सकता है ओखला का फैसला?
ओखला में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, जहां आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM के बीच मुस्लिम वोटों के लिए संघर्ष होगा, जबकि बीजेपी हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश में है।
संभावित समीकरण
AAP की मजबूत स्थिति: अमानतुल्लाह खान की पकड़ इस क्षेत्र में मजबूत मानी जाती है, लेकिन AIMIM के मैदान में आने से उन्हें चुनौती मिल सकती है।
कांग्रेस की चुनौती: कांग्रेस की उम्मीदवार अरीबा खान भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगा सकती हैं, जिससे मुकाबला रोचक हो सकता है।
AIMIM का प्रभाव: यदि ओवैसी की पार्टी मुस्लिम वोटों को आकर्षित करने में सफल होती है, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को हो सकता है।
बीजेपी की रणनीति: बीजेपी इस सीट पर ध्रुवीकरण के सहारे अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है।
निष्कर्ष: ओखला की जनता किसे चुनेगी?
okhla vidhansabha: अभी तक के राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि ओखला की जनता किसके पक्ष में फैसला लेगी। लेकिन अमानतुल्लाह खान के इस बयान से साफ है कि वह ओवैसी को सीधी चुनौती दे रहे हैं और यह चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है।
अब देखना होगा कि असदुद्दीन ओवैसी इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इसका असर ओखला के चुनावी नतीजों पर पड़ता है।












