Bihar Topper 2026: मुफ़लिसी हार गई, हौसलों ने लिखी क़ामयाबी की इबारत: सबरीन, पुष्पांजलि और नाहिद सुल्ताना बनीं मिसाल
“खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है…”
Bihar Topper 2026: इस शेर को हकीकत में बदलकर दिखाया है बिहार की तीन बेटियों सबरीन परवीन, पुष्पांजलि कुमारी और नाहिद सुल्ताना ने, जिन्होंने गरीबी की बेड़ियों को तोड़कर सफलता का नया इतिहास रच दिया।
29 मार्च 2026 को जैसे ही बिहार बोर्ड ने दसवीं का परिणाम घोषित किया, पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन सबसे ज्यादा चमक उस घर में थी, जहां कभी सन्नाटा और संघर्ष था, आज वहां जश्न, गर्व और सम्मान का माहौल है।
गरीबी नहीं बनी बाधा, बनी प्रेरणा
Bihar Topper 2026: मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपने बच्चों का भविष्य संवारने वाले माता-पिता ने कभी हालात को अपनी बेटियों के सपनों के रास्ते में नहीं आने दिया। इसी का नतीजा है कि आज ये बेटियां पूरे बिहार की शान बन गई हैं।

टॉपर्स की चमक से रोशन हुआ बिहार
Bihar Topper 2026: सबरिन परवीन और पुष्पांजलि कुमारी ने 500 में से 492 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। नाहिद सुल्ताना ने 489 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।
जैसे ही सबरीन के टॉपर बनने की खबर फैली, उनके घर के बाहर लोगों की लंबी कतार लग गई। जो लोग पहले हालचाल तक नहीं पूछते थे, आज वही बधाई देने के लिए उमड़ पड़े। आम जनता से लेकर नेताओं तक, हर कोई इस सफलता की कहानी सुनना चाहता है।
मेहनत, अनुशासन और तकनीक का संगम
Bihar Topper 2026: सबरिन कहती हैं, “मैंने अनुशासन के साथ पढ़ाई की। जहां समझ नहीं आया, वहां यूट्यूब की मदद ली। शिक्षकों और माता-पिता का पूरा सहयोग मिला। मेरा सपना डॉक्टर बनना है।”
उनके पिता सज्जाद आलम पश्चिम बंगाल में टायर का व्यवसाय करते हैं और मां अंगूरी खातून गृहिणी हैं, लेकिन उनके सपनों की उड़ान किसी भी संसाधन से बड़ी निकली।

बेटियों की सफलता से बदली सोच
इस परीक्षा में 15 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए, जिनमें छात्राओं की संख्या अधिक रही और टॉप पोजीशन पर बेटियों का कब्जा इस बात का प्रमाण है कि बदलता भारत अब बेटियों के साथ खड़ा है।
प्रेरणा जो इतिहास बन गई
सबरिन, पुष्पांजलि और नाहिद की यह कहानी सिर्फ परीक्षा में सफलता की नहीं है, यह उस जज़्बे की कहानी है जो बताती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है।












