Waqf Amendment Bill: बिहार में सियासत गरमाई, लालू-तेजस्वी ने किया AIMPLB का खुला समर्थन
Waqf Amendment Bill: पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लेकर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने इस विधेयक का खुलकर विरोध किया और मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े होने का ऐलान किया। पटना में आयोजित एक विशाल विरोध प्रदर्शन में लालू और तेजस्वी ने न केवल भाग लिया, बल्कि केंद्र सरकार पर जोरदार हमला भी बोला।
Waqf Amendment Bill: प्रदर्शन का आयोजन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के नेतृत्व में किया गया था, जिसमें बिहार के हजारों लोग शामिल हुए। AIMPLB ने इस बिल को मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वतंत्रता पर हमला** बताया और इसके खिलाफ देशभर में आंदोलन करने की घोषणा की।
क्या है वक्फ संशोधन विधेयक 2024?
Waqf Amendment Bill: वक्फ संपत्तियों से जुड़े इस विधेयक में कई बदलाव किए गए हैं, जिससे वक्फ बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। AIMPLB और मुस्लिम संगठनों का मानना है कि इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी और सरकार इन संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए मनमानी कर सकेगी।
इस विधेयक के कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- सरकार की निगरानी: वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने के लिए प्रावधान किया गया है।
- वक्फ बोर्ड की शक्तियां सीमित: पहले वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों का स्वतंत्र रूप से संचालन कर सकता था, लेकिन नए कानून में इसके अधिकार सीमित किए जा रहे हैं।
- निगरानी तंत्र: सरकार अब वक्फ बोर्ड के कामकाज की गहराई से जांच कर सकेगी और इसमें हस्तक्षेप कर सकेगी।
AIMPLB के अनुसार, यह विधेयक मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वतंत्रता को कमजोर करने की साजिश है।
पटना में प्रदर्शन: लालू-तेजस्वी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला
Waqf Amendment Bill: पटना के गांधी मैदान में हुए इस विरोध प्रदर्शन में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंच से मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। लालू यादव ने कहा,
“हम मुसलमान भाइयों के साथ हैं, उनकी जमीन और संपत्ति छीनने की कोशिश हो रही है। लेकिन जब तक हम जिंदा हैं, किसी की हिम्मत नहीं कि उनके अधिकारों को छीन सके।”
वहीं, तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा,
“यह सरकार केवल नफरत की राजनीति करती है। कभी मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को लड़ाती है, कभी धर्म के नाम पर संपत्तियों पर कब्जा करने की साजिश करती है। हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। राजद हमेशा से वंचितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के साथ खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी।”
इस प्रदर्शन में बिहार के कई अन्य विपक्षी दलों के नेता भी शामिल हुए, जिनमें कांग्रेस, वाम दलों और कुछ क्षेत्रीय संगठनों के नेता भी मौजूद थे।
बीजेपी और एनडीए की प्रतिक्रिया
राजद और AIMPLB के विरोध प्रदर्शन पर बीजेपी और एनडीए के सहयोगियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस विरोध प्रदर्शन को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा,
“यह पूरी तरह से तुष्टीकरण की राजनीति है। जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, तब राजद जैसे दल मुस्लिम वोटों को लुभाने के लिए ऐसे मुद्दे उठाते हैं। वक्फ बोर्ड के नियमों में बदलाव का उद्देश्य पारदर्शिता लाना है, लेकिन इसे जबरदस्ती सांप्रदायिक मुद्दा बनाया जा रहा है।”
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजद मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहा है और केंद्र सरकार का मकसद केवल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रशासन को सुनिश्चित करना है।
AIMPLB का देशव्यापी आंदोलन
AIMPLB ने इस मुद्दे को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे पूरे देश में आंदोलन का रूप देने का ऐलान किया है। संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा,
“हम इस काले कानून को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। यह हमारे धार्मिक और सामाजिक अधिकारों का हनन है। हम इसके खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ेंगे।”
AIMPLB ने आगामी महीनों में दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में बड़े विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।
क्या कह रहे हैं राजनीतिक विश्लेषक?
राजद द्वारा मुस्लिम समुदाय के समर्थन में खुलकर आने को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं और राजद पहले से ही मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू और तेजस्वी इस मुद्दे को लेकर अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इसके कारण राजद को गैर-मुस्लिम समुदाय की नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, बीजेपी और एनडीए इस मुद्दे पर राजद को तुष्टीकरण की राजनीति करने वाला दल साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।












