Corruption in UPSIDA: भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने योगी सरकार के प्रयासों पर फेरा पानी, उद्योग स्थापना हो रही कठिन
Corruption in UPSIDA: लखनऊ (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के सतत प्रयासों से राज्य की छवि में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है और देश-विदेश के उद्योगपति राज्य में निवेश की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। अंबानी और अडानी जैसे औद्योगिक घरानों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है, और अन्य कई उद्योगपति भी यूपी में अपनी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।
लेकिन यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) में जमे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से निवेशकों को निराशा हाथ लग रही है। इन भ्रष्टाचारियों के कारण न केवल प्रदेश की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के निवेशकों को अपमान, शोषण और आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
छोटे निवेशकों का खुला शोषण, बिना रिश्वत नहीं होता कोई काम
जहाँ बड़े उद्योगपति सीधे मुख्यमंत्री स्तर से कार्य करवा लेते हैं, वहीं छोटे और मध्यम वर्गीय उद्यमियों को क्षेत्रीय कार्यालयों में बैठे बाबुओं द्वारा खुलेआम लूटा जा रहा है। पूर्वांचल में निवेश करने वाले दिल्ली और नोएडा के उद्यमियों को जानबूझकर कार्यालयों के चक्कर लगवाए जाते हैं और रिश्वत दिए बिना कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं होती।
भ्रष्टाचार की पड़ताल में खुली चौंकाने वाली सच्चाई
रिपोर्टर ने ग्रेटर नोएडा (कासना), गाजियाबाद, ट्रोनिका सिटी, बरेली, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या स्थित यूपीसीडा के रीजनल कार्यालयों का दौरा किया। एक भूखंड की लीज डीड करवाने की प्रक्रिया में शामिल होने पर सामने आया कि कार्यालयों में दलाल सक्रिय हैं, और घूसखोरी का खेल खुलेआम चल रहा है। रिश्वत देने वाले का काम प्राथमिकता से होता है, जबकि जो नियमों की बात करता है, उसे अधूरी जानकारी देकर टरका दिया जाता है।
पीड़ितों को डर, भ्रष्टाचारियों को खुली छूट
बाबुओं की धौंस के कारण कोई भी निवेशक अपनी पहचान उजागर करने से डरता है। इसी भय का फायदा उठाकर घूसखोरी की जड़ें और मजबूत हो रही हैं।
कार्यालय में रिश्वत की तयशुदा दरें
आवेदन भरवाने की फीस (अनजान निवेशकों से) – ₹1000
लीज डीड कागज़ तैयार करवाने पर– ₹50 प्रति वर्गमीटर
रजिस्ट्रार के नाम पर ली जाती फीस – सर्किल रेट का 1%
भूखंड ट्रांसफर करवाने की रिश्वत – ₹100 से ₹200 प्रति वर्गमीटर
निरस्त भूखंड को पुनर्जीवित कराने के लिए – ₹100 प्रति वर्गमीटर
रिफंड के लिए लग जाते हैं सालों, फिर भी नहीं मिलता पैसा
निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने वाले कई निवेशकों के आवेदन बिना कारण निरस्त कर दिए जाते हैं और फिर उनका रिफंड वर्षों तक अटका रहता है।
केस स्टडी:
दिल्ली के एक निवेशक ने बताया कि उन्होंने 2 जून 2023 को आवेदन संख्या SER20220712/1005/1580/54730 के तहत दिबियापुर, कानपुर जोन में भूखंड के लिए आवेदन किया था, जिसे 4 जुलाई 2023 को निरस्त कर दिया गया। रिफंड की मांग पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरटीआई से जानकारी मिली कि चेक बना दिया गया है, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। वर्ष 2025 तक भी उन्हें रिफंड नहीं मिला।
आवंटन पत्र पर आवंटन संख्या नहीं दी जाती
जोनल कार्यालय के कर्मचारी जानबूझकर आवंटन पत्र में आवंटन संख्या नहीं लिखते जिससे कि समय पर भुगतान न होने पर आवंटन निरस्त हो जाए। फिर उसी संख्या के लिए आवंटी से घूस ली जाती है।
कासना, बरेली और अयोध्या कार्यालयों में चरम पर है भ्रष्टाचार
अयोध्या कार्यालय में यूनियन से जुड़े एक अधिकारी खुद को सीईओ से अधिक शक्तिशाली बताते हैं और यूपीसीडा के लिफाफे में खुलेआम रिश्वत लेते देखे गए। जब शिकायत की बात की गई तो कहा गया, “जिससे शिकायत करनी है कर लो, लेकिन तुम्हारा खेल मैं जरूर बिगाड़ूंगा।”
निवेश सारथी’ की भूमिका सराहनीय, लेकिन बाबुओं की अनदेखी
सरकार द्वारा नियुक्त ‘निवेश सारथी’ की सेवाओं की निवेशकों ने सराहना की, लेकिन बताया कि यूपीसीडा के बाबू इनकी बातों को भी अनसुना कर देते हैं।
निष्कर्ष:
यूपीसीडा के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने योगी सरकार की निवेश नीति की साख पर बट्टा लगा दिया है। यदि तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो छोटे और मध्यम स्तर के निवेशकों का पलायन उत्तर प्रदेश से तेज़ी से बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बनाई गई “निवेश अनुकूल छवि” को बचाने के लिए अब निर्णायक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।













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