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delhi liquor policy: नई आबकारी नीति से पीछे हटी सरकार, पुरानी नीति को 31 मार्च 2026 तक विस्तार

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delhi liquor policy: दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति लागू करने की अपनी पूर्व घोषणा से अचानक पीछे हटते हुए वर्तमान में प्रभावी पुरानी आबकारी नीति को नौ महीने के लिए और बढ़ा दिया है। अब यह नीति 1 जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि नई नीति 1 अप्रैल 2026 से ही लागू की जा सकेगी।

delhi liquor policy: सरकार के इस कदम ने कई सवालों को जन्म दिया है, क्योंकि कुछ ही दिन पहले सरकार ने यह दावा किया था कि 30 जून 2025 तक नई आबकारी नीति को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। लेकिन अब इससे पहले ही पुरानी नीति को नौ महीने के लिए बढ़ा देना, सरकार की तैयारी और नीति निर्धारण की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

🔍 क्या है मामला?

delhi liquor policy: दिल्ली सरकार ने वर्ष 2021-22 में एक नई आबकारी नीति लागू की थी, जिसमें शराब की बिक्री का जिम्मा निजी हाथों को सौंपा गया था। लेकिन इस नीति को लेकर बड़े पैमाने पर विवाद, आरोप-प्रत्यारोप, और सीबीआई जांच की स्थिति बनी, जिससे सरकार को यह नीति वापस लेनी पड़ी। इसके बाद से अब तक पुरानी प्रणाली को ही अस्थायी रूप से हर वर्ष विस्तार दिया जा रहा है, जिसमें दिल्ली में शराब की बिक्री सिर्फ चार सरकारी एजेंसियों के ज़रिए होती है — DSIIDC, DTTDC, DSCSC, और DCCWS।

इस साल 30 जून को भी जब यह नीति समाप्त होने वाली थी, तब सरकार ने इसे नौ महीने और बढ़ा दिया। यह अब 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी।

📌 नीति विस्तार से जुड़े आदेश की मुख्य बातें:

  1. नीति विस्तार का कारण:
    नई आबकारी नीति का मसौदा समय पर तैयार नहीं हो सका। सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था, जिसमें अन्य राज्यों की आबकारी नीतियों का अध्ययन कर एक पारदर्शी और लाभदायक नीति लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन समिति अपनी समयसीमा (30 जून 2025) तक मसौदा तैयार नहीं कर पाई।
  2. लाइसेंस नवीनीकरण के नियम:
    नीति विस्तार आदेश में स्पष्ट किया गया है कि: यदि कोई लाइसेंसधारक सर्कुलर जारी होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर नवीनीकरण शुल्क का भुगतान करता है, तो उसे केवल मूल शुल्क देना होगा।
    यदि भुगतान 30 से 60 दिनों के बीच किया जाता है, तो 25% अतिरिक्त शुल्क के साथ भुगतान करना होगा।
    यदि भुगतान 60 दिनों के बाद किया जाता है, तो लाइसेंस शुल्क के साथ 100% अतिरिक्त वार्षिक शुल्क देना होगा।
  3. कोई निजी भागीदारी नहीं:
    इस विस्तारित नीति में किसी भी निजी खिलाड़ी को शराब की खुदरा बिक्री में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। शराब की पूरी आपूर्ति और वितरण सरकार के नियंत्रण में ही रहेगा।

❓ सवाल जो उठ रहे हैं:

नीति विस्तार की आवश्यकता क्यों पड़ी, जबकि सरकार बार-बार यह दावा कर रही थी कि नई नीति 30 जून तक लागू हो जाएगी?
क्या यह विस्तार सरकार की विफल योजना प्रक्रिया को नहीं दर्शाता? क्या सरकार एक बार फिर विवाद और आलोचनाओं से बचने के लिए पुरानी व्यवस्था बनाए रखना चाहती है?
उपभोक्ता हित,उद्योग हित, और राजस्व हानि जैसे मुद्दों पर इस निर्णय का क्या प्रभाव होगा?

📉 नीति विस्तार का असर:

उपभोक्ताओं को सीमित विकल्प:
दिल्ली में शराब के ब्रांड विकल्प सीमित हैं, जिससे ग्राहक हरियाणा और नोएडा जैसे इलाकों में जाकर शराब खरीदने को मजबूर हैं।

राजस्व में भारी नुकसान:
नीति के तहत सीमित दुकानों और ब्रांडों के चलते सरकार को हर साल 1000 से 1500 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है।

व्यवसायियों की अनिश्चितता:
जिन व्यापारियों को नई नीति से अवसर मिलने की उम्मीद थी, वे एक बार फिर से असमंजस की स्थिति में हैं।

🔮 आगे क्या?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई आबकारी नीति पर काम अभी भी जारी है और वह इसे सिस्टम में पारदर्शिता, बेहतर ब्रांड उपलब्धता, और राजस्व बढ़ोतरी के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए लाना चाहती है। लेकिन यह भी तय है कि अब यह नीति 1 अप्रैल 2026 से पहले लागू नहीं होगी।

📝 निष्कर्ष:

दिल्ली सरकार का नई आबकारी नीति को बार-बार टालना और बार-बार पुरानी नीति को बढ़ाते जाना यह दर्शाता है कि नीति निर्धारण में गंभीर खामियां हैं। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह दिल्ली की जनता और व्यापार जगत की उम्मीदों पर भी कुठाराघात जैसा है। नई नीति को लेकर उम्मीद तो है, लेकिन कब तक — यह सवाल अब भी बना हुआ है।

 

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