AZAMGARH NEWS: प्रशासन की मिलीभगत से फलफूल रहा है नकली दवाईयों और झोलाछाप डॉक्टरों का कारोबार
AZAMGARH NEWS आजमगढ़। सरकार नकली दवाईयों का कारोबार करने और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही और भ्र्ष्टाचार के कारण सरकार को कामयाबी नहीं मिल रही है। जबकि यूपी के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश मिश्रा लगातार हॉस्पिटलों का दौरा करके हालात को समझने और जनता को बेहतर सुविधा मिल सके इस के लिए प्रयास कर रहे हैं।
आजमगढ़ ज़िले में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क गांव से लेकर शहरों तक फैला हुआ है। झोलाछाप डॉक्टरों का क्षेत्र में बेख़ौफ़ प्रैक्टिस करना, क्लिनिक और बड़े बड़े हॉस्पिटल खोल कर जनता को लूटने और लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का कारोबार देख कर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि यह सब प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।
मासिक किराये पर फार्मासिस्ट अनुबंध करते हैं मेडिकल स्टोर मालिक
AZAMGARH NEWS मेडिकल स्टोर खोलने के फार्मासिस्ट का होना आवश्यक होता है। प्रशासन में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए भी फार्मासिस्ट की डिग्री की कॉपी लगायी जाती है। दवा की दुकान खोलने के यह ज़रूरी है कि दुकान के मालिक अथवा लाइसेंस होल्डर के पास फार्मासिस्ट की डिग्री हो लेकिन यहाँ खेल कुछ और चल रहा है। आठवीं और दसवीं पास लोग किराये पर फार्मासिस्ट की डिग्री ले कर दवा की दुकान खोल कर प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं।Rahul Gandhi : अडानी के घोटालों से उठने लगा है पर्दा, सदन में राहुल गाँधी ने केंद्र सरकार को घेरा
ज़्यादा मुनाफा के लिए बेचते हैं नकली दवाईयां
AZAMGARH NEWS ज़्यादातर मेडिकल स्टोर ज़्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में नकली दवाईयां बेच रहे हैं। यह वह दवाइयां होती हैं जिससे न मरीज को राहत मिलती है और न ही कोई नुकसान करती है। मरीज नकली दवाईयां खाता रहता है और डॉक्टरों के चक्कर लगाता रहता है। स्वास्थ्य विभाग की यह ज़िम्मेदारी होती है कि समय समय पर क्षेत्र में दवा की दुकानों का औचक निरीक्षण करके यह देखे की क्या सब कुछ नियमों के अनुसार चल रहा है अथवा नहीं। नियमों के विरुद्ध चल रहे मेडिकल स्टोरों और नकली दवा बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे लेकिन यहाँ ऐसा कुछ नहीं होता है। जिन अधिकारीयों की यह ड्यूटी है कि वह व्यवस्था को भ्र्ष्टाचार मुक्त और जनहित में चलाये वही लोग मासिक वसूली करके अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।
मेडिकल स्टोरों से लाखों रुपया मिलता है सरकारी डॉक्टरों को कमीशन
AZAMGARH NEWS सरकारी अस्पतालों के बाहर खुले ढेर सारे मेडिकल स्टोर सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के रहमों करम पर चल रहे हैं। कमीशन के चक्कर में सरकारी डॉक्टर वही दवा मरीज को लिखता है जो अस्पताल में मौजूद नहीं होती है। कमीशन ज़्यादा मिले इस लिए डॉक्टर आवश्यकता से अधिक दवाईयां मरीजों को लिख देते हैं और मरीज मज़बूरी में दवा को खरीदता है। बहुत से डॉक्टर तो मरीज को यह भी बताते हैं कि दवा किस दूकान से खरीदना है। डॉक्टर का कमीशन और दुकानदार का मुनाफा देने के बाद भी अगर मरीज को कोई फायदा न हो तो ज़िम्मेदार कौन है ?PM Modi in Himachal : ऊना से वंदे भारत ट्रेन रवाना करने के बाद चंबा में बोले मोदी, जनता मेरी हाईकमान
AZAMGARH NEWS अगर मरीज डॉक्टर से यह सवाल करता है कि इस दवा से कोई लाभ नहीं हो रहा है तो डॉक्टर दवा बदल कर दूसरी दवा लिख देता है और मरीज फिर एक से दो सप्ताह की दवा लेकर घर चला जाता है। मरीज को लाभ नहीं मिल रहा है, बीमारी बढ़ रही है और पैसा खत्म हो रहा है। जनता के जीवन की रक्षा की जिन लोगों की ज़िम्मेदारी है जब वही लोग खून चूसने लग जायेंगें तो उनकी रक्षा कौन करेगा ?












