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Jamiat Ulema- I- Hind Confrence 2023 : भारत जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है, उतना ही महमूद का है – महमूद मदनी

दिल्ली। जमीअत उलेमा-ए-हिन्द का ३४वां अधिवेशन दिल्ली के रामलीला मैदान में चल रहा है, जहा लाखों की संख्या में मुसलमान जमा हैं। जमीअत उलेमा-ए-हिन्द मुसलमानों का सौ साल पुराना संगठन है जो कि भारत ही नहीं बल्कि दुनियां के कई मुल्कों में मुसलमानों शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। दिल्ली में चल रहे अधिवेशन में जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा है। भारत किसी जाति या धर्म विशेष का मुल्क नहीं है बल्कि भारत में रहने वाले सभी भारतियों का मुल्क है। मदनी ने अपने भाषण में कहा कि भारत जितना नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत का है उतना ही महमूद का है। jamiat Ulama-I-Hind Conference 2023 : अल्लाह और ॐ एक हैं, हम अल्लाह कहते हैं और वह ॐ कहते हैं – अरशद मदनी

महमूद मदनी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के अधिवेशन में कहा कि हमारा भाजपा या आरएसएस से हमारा कोई मजहबी अदावत नहीं है, बल्कि हमारा विरोध उनकी विचारधारा से है जिससे मुल्क असमानता और विघटन पैदा हो रहा है, नफरत बढ़ रही है, सद्भाव और भाईचारा समाप्त करने और लोगों को आपस लड़वाने वाले कोशिस के खिलाफ हैं। मदनी ने कहा कि हमारी नज़र में हिन्दू और मुसलमान दोनों भाई है। महमूद मदनी ने कहा कि जमीअत उलेमा-ए-हिन्द हमेशा इंसानों को एक सामान मानता है, हमारे लिए सब बराबर हैं कोई छोटा और बड़ा नहीं है, हम चाहते हैं कि सबको समान अधिकार और सम्मान मिले। मदनी ने कहा कि समान नागरिकता कानून सिर्फ मुसलमानों का मसला नहीं है बल्कि भारत के तमाम पिछड़े और दबे कुचले समाज का मसला है। jamiat ulema e hind

मदनी ने कहा कि अल्पसंख्यकों का आरएसएस और भाजपा से सिर्फ विचारधारा को लेकर मतभेद है, न कि मनभेद है। हमें और उन्हें भी समझ लेना चाहिए कि यह मतभेद जिंदगी को खूबसूरत बनाता है और विरोध तंग दिली का लक्षण है। मदनी ने कहा कि इस देश की आबादी करीब 140 करोड़ है। यह लाखों वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। विभिन्न संस्कृति, भाषाएं, खान पान के तरीके और सोचने के अंदाज़ अलग-अलग होने के बावजूद यह देश जुड़ा हुआ है और एक साथ है। इसमें मुसलमानों का बड़ा किरदार है।

मदनी ने कहा कि इस धरती की खासियत यह है कि खुदा के सबसे पहले पैगम्बर अबुल बशर सैयदना आदम अलैहिस्सलाम की यह सरजमीन है। यह धरती इस्लाम की जन्मस्थली है। यह मुलसमानों का पहला वतन है। इसलिए यह कहना कि इस्लाम बाहर से आया कोई मजहब है, सरासर गलत है और ऐतिहासिक आधार पर बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि भारत हिंदी-मुसलमानों के लिए वतनी और दीनी (धार्मिक) दोनों लिहाज से सबसे अच्छी जगह है।

मदनी ने कहा कि यह देश जितना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का है, उतना ही यह महमूद का भी है। महमूद ना तो एक इंच आगे है, ना पीछे है और वे भी महमूद से एक इंच आगे नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सबसे ज्यादा चिंता की बात हिंदुत्व की गलत व्याख्या है और समग्र राष्ट्रवाद की हमारी पुरानी विचारधारा के बीच वैचारिक टकराव पैदा करने की आक्रामक कोशिश है। हिंदुत्व के नाम पर जिस तरह से आक्रामक सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह इस देश की मिट्टी और खुशबू से मेल नहीं खाती है।


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