Patna News: अज़ीमाबाद (पटना सिटी) के मंगल तालाब के इर्द-गिर्द आपको कहीं चमचमाता स्टेडियम दिखाई देगा तो कहीं भव्य ऑडिटोरियम। मगर मंगल तालाब के दूसरी तरफ जाते ही आपको अपनी बदहाली पर रोता एक दूसरा नज़ारा भी देखने को मिलेगा। खुले मैदान के कोने में खड़ी एक इमारत का ढ़ांचा, जिसे खंडहर कहना भी गलत नहीं होगा।
Patna News: इस खंडहर में हर तरफ गंदगी बिखरी पड़ी है। इमारत पर गौर करने पर ही आपको पता चल पायेगा कि यह किसी ज़माने में कोई उर्दू लाइब्रेरी हुआ करती थी। मगर फिलहाल तो यहां किताबों की जगह विरानीयत ही छाई है। मंगल तालाब के बाकि नज़ारे के सामने इस इलाके के नज़ारे को देखकर तो यही लगता है कि इसके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है।

सन् 1939 में कुछ अदीबों और दानिशवर लोगों के प्रयास से लेबर मिनिस्ट्री द्वारा इसकी नींव रखी गई थी। तब यह लाइब्रेरी कई दानिशवर , लेखकों, साहित्यकारों और देश की आजादी के लिए लड़ रहे मुजाहिद ए आज़ादी का केन्द्र बनी रहती थी। यहां देश और राज्य की कई गंभीर मुद्दों पर बड़ी-बड़ी चर्चाएं हुआ करती थी।
Patna News: आज़ादी की लड़ाई के समय यह लाईब्रेरी कई चर्चाओं का केन्द्र बनी रहती थी। मशहूर क्रांतिकारी गीत ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ के रचयिता सैयद हसन “बिस्मिल अजि़माबादी” के लिए भी यह जगह उनके खास जगहों में से एक थी। वो अकसर यहां किताबों के बीच अपना वक़्त गुज़ारा करते थे। मगर आज सरकार की अनदेखी के कारण यह जगह इतिहास बनकर रह गई है।
उर्दू के विकास के लिए बनी इस लाइब्रेरी में सिर्फ उर्दू की किताबें ही नहीं, बल्कि यहां आने वाले लोगों को देश विदेश की अलग-अलग भाषाओं की किताबें और पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने का मौका मिलता था। करीब 10 हज़ार किताबों के संग्रह में फ्रांस, जर्मन, ईरान, रूस, अमेरिका आदि देशों से आने वाली किताबें और पत्र-पत्रिकाएं भी शामिल हुआ करती थीं।
- पत्रकार – अभिषेक श्रीवास्तव
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