‘उदयपुर फाइल्स’ पर रोक: यह फैसला केवल फिल्म पर नहीं, सांप्रदायिक एजेंडे पर भी लगाम है-मौलाना अरशद मदनी
नई दिल्ली। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा ‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म की रिलीज़ पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद, याचिकाकर्ता और जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे संविधान और सामाजिक सौहार्द की जीत बताया है।
गुरुवार (10 जुलाई) को जारी अपने बयान में मौलाना मदनी ने कहा, “हम अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन दिनभर चली सुनवाई के बाद जो आदेश आया, वह इस बात की स्पष्ट पुष्टि करता है कि भले ही कुछ आपत्तिजनक दृश्य हटा दिए गए हों, लेकिन फिल्म में अब भी ऐसे अंश मौजूद हैं जो समाज में नफरत और वैमनस्य को हवा दे सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि अदालत का यह निर्णय न केवल संविधान की सर्वोच्चता को दोहराता है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कोई भी संवैधानिक और नैतिक सीमाओं का उल्लंघन नहीं कर सकता।
‘पूरे समुदाय को ठहराया गया अपराधी’
मौलाना मदनी ने फिल्म की कथावस्तु पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “इस फिल्म में एक जघन्य हत्या की आड़ में पूरे समुदाय को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है, जैसे सभी लोग उस अपराध के दोषी हों। ऐसी एकतरफा और भड़काऊ प्रस्तुति से सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई विवादित फिल्में बनीं, लेकिन ‘उदयपुर फाइल्स’ जैसी घृणात्मक प्रवृत्ति शायद ही पहले देखने को मिली हो। “इसीलिए हमने कानूनी रास्ता चुना और अदालत से गुहार लगाई। हमें संतोष है कि हमारी पहल सार्थक रही और इंशाल्लाह अंतिम फैसला भी न्यायोचित होगा। यह निर्णय केवल एक फिल्म पर नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सोच और विभाजनकारी एजेंडे पर भी नकेल कसने जैसा है।”
‘कपिल सिब्बल ने मजबूती से रखा पक्ष’
मदनी ने अपने वकीलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में बेहद प्रभावशाली ढंग से यह स्पष्ट किया कि यह फिल्म भारत के बहुलतावादी और समावेशी समाज के लिए किस तरह एक खतरा बन सकती है।”
‘भविष्य के लिए उदाहरण बनेगा यह फैसला’
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह फैसला अन्य फिल्म निर्माताओं के लिए भी एक चेतावनी होगा। “यह निर्णय एक नजीर बनकर सामने आएगा, जो उन फिल्म निर्माताओं के लिए सबक साबित होगा जो नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं को तुष्ट करने की मंशा से ऐसी फिल्मों का निर्माण करते हैं और देश की शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं।”
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