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Uttrakhand News: क़ानून व्यवस्था बनाये रखें, किसी के जान व माल का नुकसान न होने पाये – हाई कोर्ट

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Uttrakhand News: दिल्ली। उत्तराखंड के राज्य के अलग अलग ज़िलों में बढ़ साम्प्रदायिक तनाव को देखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक एनजीओ की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि राज्य की क़ानून व्यवस्था बनाये रखें और सबके जान व माल की हिफाजत किया जाए। उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में बढ़ रहे साम्प्रदायिक तनाव को देखते यह फैसला सुनाया है।

Uttrakhand News: हिंदी लाइव वेबसाइट के अनुसार गुरुवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक उत्तरकाशी में बढ़ रहे साम्प्रदायिक तनाव के मद्देनज़र उत्तराखंड हाईकोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने एवं नागरिकों के जान व माल की हिफाजत करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि क़ानून व्यवस्था बनी रहे और किसी के जान व माल का नुकसान न हो।

न्यायधीश विपिन सांघी और न्यायधीश राकेश थपलियाल की पीठ

न्यायधीश विपिन सांघी और न्यायधीश राकेश थपलियाल की पीठ ने एक एनजीओ के द्वारा दायर याचिका में नोटिस जारी करते हुए निर्देश जारी किया, जिसमें हिंदुत्ववादी संगठन द्वारा पुरोला में घोषित महापंचायत को रोकने और इलाके के मुसलमानों को जगह खाली करने की चेतावनी देने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गयी थी। इसे भी पढ़े –https://www.unitedindialive.com/hindi-news-dehradun-muslims-ulema-panchayt-uttrakhand-united-india-live/

Uttrakhand News: सुनवाई के दौरान उत्तराखंड के महाधिवक्ता एस एन बाबुलकर ने अदालत को बताय कि मुस्लिम समाज की महापंचायत को राज्य के हस्तक्षेप के बाद रद्द कर दिया गया है और हालात पूरी तरह से नियंत्रण में है। यह ब्यान दर्ज करते हुये पीठ ने राज्य सरकार को अपने संवैधानिक दायित्व का पूरा निर्वाहन करने का निर्देश दिया।

पीठ ने याचिकाकर्ता, उसके सहयोगियों को भी स्थिति सामान्य करने के लिए इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर बहस से बचने का निर्देश दिया।

उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने मौखिक रूप से कहा, “हम सोशल मीडिया पर आरोपों और प्रत्यारोपो के साथ उग्र नहीं होना चाहेंगें। या टीवी अथवा सोशल मीडिया पर बहस नहीं करेंगें।

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा —

याचिकाकर्ता के वकील शाहरुख़ आलम ने पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के उस आदेश का हवाला भी दिया, जिसमें उत्तराखंड पुलिस को बिना किसी औपचारिक शिकायत के भी हेट स्पीच के मामले में स्वतः संज्ञान ले कर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। एडवोकेट शाहरुख़ ने अन्य सामाग्री के अलावा 05 -06 -2023 के एक पत्र का भी उल्लेख किया, जोकि विश्व हिन्दू परिषद के लेटर हेड पर नई टिहरी ज़िले के जिला मजिस्ट्रेट को भेजा गया था।, जिसमें धमकी दी गयी थी कि क्षेत्र में रह रहे मुसलमानों ने अगर अपना घर छोड़ कर यहाँ से नहीं गए तो 20 जून को राजमार्ग अवरुद्ध कर दिया जाएगा।

अधिवक्ता शाहरुख़ आलम ने कहा कि न केवल हिंदूवादी संगठनों द्वारा आयोजित ‘महापंचायत’ बल्कि मुस्लिम धार्मिक नेताओं द्वारा 18 को प्रस्तावित जवाबी महापंचायत भी हिंसा को बढ़ावा देगी।

जनरल एस एन बाबुलकर ने पीठ को बताया कि क्षेत्र में क़ानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रशासन द्वारा उठाये कदमों पर रौशनी डालने के अलावा ‘महापंचायत’ को भी रद्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम व्यापारियों की दुकानों पर पोस्टर चिपकाने से संबंधित लोगों पर एफआईआर दर्ज की गयी है। जवाब में, अधिवकत शाहरुख़ आलम ने कहा कि एफआईआर व्यापक नहीं है और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गयी है।

चीफ जस्टिस सांघी ने शीर्ष क़ानून अधिकारी को निर्देश दिया “आप को यह सुनिश्चित करना होगा की राज्य में क़ानून व्यवस्था भंग न हो। “

 

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