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Cipla News: गरीबों के मसीहा, पदम्भूषण यूसुफ हमीद ने “सिप्ला” को कहा अलविदा

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Cipla News: दुनियां की मशहूर दवा कम्पनी सिप्ला कम्पनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी को अब ब्लैकस्टोन खरीदने जा रही है। सिप्ला उन चंद कंपनियों में है जो भारत की उम्मीदों और संघर्ष की गवाह रही है।

अब दुनिया का सबसे बड़ी प्राइवेट इक्विटी फंड ब्लैकस्टोन सिप्ला में प्रमोटर का 33.47 परसेंट हिस्सा खरीदने जा रहा है। इसके साथ ही सिप्ला का 88 साल का इतिहास भी नई करवट लेने जा रहा है। सिप्ला उन चंद कंपनियों में शामिल है, जो देश की उम्मीदों और संघर्ष का गवाह रही हैं। रेवेन्यू के हिसाब से सिप्ला आज भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। सन फार्मा और डॉक्टर रेड्डी के बाद इसका नंबर है।

Cipla News: सिप्ला की स्थापना यूसुफ हमीद के पिता ख्वाजा अब्दुल हमीद ने 1935 में की थी। उन्होंने जर्मनी में केमिस्ट्री की पढ़ाई की थी और वहां दवा तथा केमिकल बनाने के बारे में सीखा था। शुरुआत में कंपनी का नाम द केमिकल, इंडस्ट्रियल एंड फार्मास्यूटिकल लैबोरेटरीज था।

देशभक्ति कूट – कूट कर भरी हुई थी
Cipla News: महात्मा गांधी से लेकर सुभाष चंद्र बोस तक कई टॉप स्वतंत्रता सेनानियों ने उनकी हौसला अफजाई की थी। सिप्ला के रूप में भारत को पहली आधुनिक दवा कंपनी मिली थी जो भारतीयों को दवा की सप्लाई करती थी। यह एक स्वदेशी प्रोजेक्ट था जिसे कई दशक बाद ख्वाजा अब्दुल हमीद के बेटे ने मल्टीनेशनल दवा कंपनियों के खिलाफ लड़ाई का हथियार बना दिया था। ख्वाजा अब्दुल हमीद पाकिस्तान का विचार देने वाले सर सैय्यद अहमद खान के करीबी रिश्तेदार थे। लेकिन हमीद गांधीवादी थे और देशभक्ति उनमें कूट-कूटकर भरी थी।

पुरष्कार और मान्यता
Cipla News: उन्हें 2005 में भारत सरकार द्वारा भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। “बहुराष्ट्रीय फार्मा कंपनियों से मुकाबला करने और विकासशील देशों में जनता के लिए कुछ आवश्यक दवाओं को अधिक किफायती बनाने के लिए” युसूफ हमीद को 2012 में सीएनएन-आईबीएन द्वारा व्यवसाय की श्रेणी में ‘सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया था। 2013 के अंत में, समाचार प्रसारक एनडीटीवी द्वारा उन्हें भारत के “25 महानतम वैश्विक जीवित महापुरूषों” में से एक नामित किया गया था। हाल ही में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में क्रिएटिंग इमर्जिंग मार्केट्स प्रोजेक्ट के लिए उनका साक्षात्कार भी लिया गया था, जिसमें विकासशील दुनिया में गरीब लोगों के इलाज में मदद करने के लिए एड्स उपचार और अन्य दवाएं प्रदान करने की उनकी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।

कैसे बने गरीबों के मसीहा ?
Cipla News: सिप्ला कम्पनी महंगी और गरीबों की पहुँच से दूर रहने दवाईयों की कॉपी करके उसका वर्जन तैयार करती थी और उसे बाजार में सस्ते दामों पर बेचती थी, जिससे की हर जरूरतमंद तक आसानी से दवा पहुँच सके और उसके जीवन की रक्षा हो सके। साल 2006 में जब एवियन फ्लू फैला तो सिप्ला ने Roche की दवा Tamiflu को कॉपी करके काफी सस्ती कीमत पर इसे बेचा। हमीद की लीडरशिप में सिप्ला ने मल्टीनेशनल कंपनियों की सैकड़ों दवाओं को कॉपी करके उनका सस्ता वर्जन बनाया। यही वजह है कि उन्हें गरीबों का मसीहा भी कहा जाता है। अब ब्लैकस्टोन कंपनी सिप्ला में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी खरीद रही है। इसके साथ ही कंपनी से हमीद परिवार की विदाई हो सकती है। हमीद 2013 से कंपनी में एक्टिव नहीं हैं। उनकी भतीजी समीना कंपनी की एग्जीक्यूटिव वाइस-चेयरपर्सन हैं।

 

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