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Delhi News

political news: मायावती का कांग्रेस-भाजपा पर हमला: ओबीसी के साथ सिर्फ दिखावा, बसपा ही सच्ची हितैषी

political news:  नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही सियासी बयानबाज़ियों, गठबंधन समीकरणों और जातीय समीकरणों का दौर तेज़ हो गया है। इसी राजनीतिक हलचल के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ओबीसी आरक्षण को लेकर कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को अवसरवादी बताते हुए राहुल गांधी के बयानों को “घड़ियाली आंसू” करार दिया और कहा कि कांग्रेस ने हमेशा ओबीसी वर्ग के साथ छल किया है।
इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा और एनडीए पर भी करारा प्रहार किया और ओबीसी समुदाय को सचेत रहने की सलाह दी है। मायावती ने कहा कि दोनों राष्ट्रीय दल ओबीसी समाज का केवल “राजनीतिक उपयोग” करते हैं लेकिन वास्तव में उन्हें उनका हक देने के मामले में हमेशा पीछे हटते हैं।

मायावती का कांग्रेस पर हमला: “ओबीसी के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही है कांग्रेस”
political news:  प्रेस को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि कांग्रेस का ओबीसी प्रेम केवल दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक देश में शासन किया लेकिन कभी भी ओबीसी समाज के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।
“आज राहुल गांधी ओबीसी की गिनती और आरक्षण की बात कर रहे हैं, लेकिन जब उनकी सरकारें सत्ता में थीं, तब उन्होंने इस दिशा में क्या किया? यह सारा नाटक सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कांग्रेस को ‘पाखंडी’ करार देते हुए कहा कि जब भी चुनाव आते हैं, कांग्रेस को दलित और पिछड़ा वर्ग याद आने लगता है, लेकिन चुनाव के बाद वे वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।

भाजपा और एनडीए पर भी साधा निशाना: “ओबीसी समाज को अधिकार नहीं, सिर्फ नारों में जगह मिली”
political news: मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा और उसके नेतृत्व वाली एनडीए सरकारें भी इस मामले में उतनी ही दोषी हैं। उन्होंने कहा कि एनडीए ने भी ओबीसी वर्ग को केवल नारों और प्रचार का माध्यम बनाया है, न कि उनके जीवनस्तर को ऊंचा उठाने का कोई ठोस प्रयास किया है।

उन्होंने कहा,
political news:  “ओबीसी समाज को अधिकार देने का वादा करने वाले दल, चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा, दोनों ने सिर्फ उनके वोट बैंक का इस्तेमाल किया है। बसपा ही एकमात्र पार्टी है जिसने न सिर्फ नारे दिए, बल्कि शासन में रहते हुए इन वर्गों के लिए ठोस योजनाएं चलाईं।”

“बसपा की नीतियां सच्चे सामाजिक न्याय की मिसाल हैं”
political news:  मायावती ने जोर देते हुए कहा कि बसपा का मूल उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि समाज के हाशिए पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने कहा,
“हमारी पार्टी ने अपने शासनकाल में दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए जो योजनाएं बनाईं, वो जमीन पर भी उतरीं। यही कारण है कि आज भी हमारे शासन की कार्यशैली को लोग याद करते हैं।”

बिहार में बदलते सियासी समीकरण
बिहार में जहां एक ओर भाजपा और जेडीयू मिलकर एनडीए की रणनीति को धार देने में लगे हैं, वहीं कांग्रेस और राजद जैसे विपक्षी दल महागठबंधन को पुनर्जीवित करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे में मायावती की यह तीखी बयानबाज़ी साफ इशारा करती है कि बसपा बिहार में तीसरे मोर्चे के रूप में उभरने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर मायावती ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोट बैंक को साथ ला पाईं, तो राज्य में सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

चुनावी वादों को लेकर जनता में बढ़ रही है नाराज़गी
चुनाव से ठीक पहले शुरू हुए इस जुबानी जंग का असर सीधे तौर पर मतदाताओं पर पड़ सकता है। ओबीसी समाज के अंदर यह भावना घर कर रही है कि वे केवल राजनीतिक दलों के लिए एक “वोट बैंक” बन कर रह गए हैं, जबकि असल में उनके मुद्दों पर कोई गंभीरता से काम नहीं कर रहा।

मायावती के बयान इस नाराज़गी को हवा दे सकते हैं, और अगर वह इसे चुनावी एजेंडे में तब्दील करने में कामयाब होती हैं, तो बिहार चुनाव में बसपा को अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है।

मायावती ने अपने बयानों के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार जैसे राज्यों में भी अपनी राजनीतिक ज़मीन मजबूत करना चाहती हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों पर समान रूप से हमला कर, उन्होंने खुद को “वैकल्पिक और भरोसेमंद सामाजिक न्याय की आवाज़” के रूप में प्रस्तुत किया है।
अब देखना यह होगा कि बिहार की जनता मायावती के इस बदलाव को किस रूप में स्वीकार करती है — क्या यह उन्हें लाभ दिलाएगा या यह सिर्फ एक सियासी शोर बनकर रह जाएगा?


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